शेर और चूहा – एक अनोखी दोस्ती एक गर्म दोपहर थी। जंगल का राजा
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शेर और चूहा – एक अनोखी दोस्ती
एक गर्म दोपहर थी। जंगल का राजा
,
शेर ‘राजा बहादुर’
,
एक बड़े से साल के पेड़ के नीचे गहरी नींद में सो रहा था। उसकी दुम धीरे-धीरे हिल रही थी और वह ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे ले रहा था।
उधर
,
एक छोटा-सा शरारती चूहा ‘मिंटू’
,
खेलते-खेलते वहीं आ पहुंचा। उसने देखा कि एक बहुत बड़ा शेर सोया है। मिंटू का मन शरारत करने का हुआ। वह धीरे-धीरे शेर की पीठ पर चढ़ गया और ऐसे उछलने-कूदने लगा जैसे कोई घोड़े की सवारी कर रहा हो।
अचानक शेर की नींद खुल गई। उसने ग़ुस्से से दहाड़ मारी – “गrrrrrr
!
”
मिंटू डर के मारे कांपने लगा। उसका रंग पीला पड़ गया। वह थरथराते हुए बोला
,
“माफ़ कीजिए महाराज
!
मैं तो बस खेल रहा था। अगर आपको तकलीफ़ हुई तो मुझे माफ़ कर दीजिए।”
शेर ने ग़ुस्से से उसकी ओर देखा
,
फिर मुस्कुरा दिया। “एक छोटा-सा चूहा मुझे नुकसान पहुंचाएगा
?
जा
,
तुझे छोड़ रहा हूँ।”
मिंटू झट से वहां से भाग गया।
कुछ दिन बाद की बात है। शेर राजा बहादुर जंगल में घूमते हुए एक शिकारी के जाल में फँस गया। वह ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ने लगा
,
लेकिन कोई उसकी मदद को नहीं आया।
तभी एक जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी – “महाराज
!
चिंता मत कीजिए
!
”
वो मिंटू था
!
वह तुरंत आया और अपने नन्हें-नन्हें दांतों से जाल की रस्सियाँ काटने लगा। थोड़ी ही देर में शेर आज़ाद हो गया।
शेर ने आश्चर्य से कहा
,
“मिंटू
!
तुमने तो मेरी जान बचा ली
!
मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक छोटा चूहा इतना बड़ा काम कर सकता है।”
मिंटू मुस्कुराया और बोला
,
“मैंने कहा था ना
,
कभी किसी छोटे को कम मत समझना।”
उस दिन के बाद से शेर और चूहा अच्छे दोस्त बन गए। जंगल के सभी जानवर उनकी दोस्ती की मिसाल देने लगे।
सीख: कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता
,
मदद करने का जज़्बा होना चाहिए।
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