### वेटर (एक डरावनी कहानी) रात का समय था। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था

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### वेटर (एक डरावनी कहानी)
रात का समय था। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। विशाल और उसके दोस्त एक पुराने
,
सुनसान ढाबे पर खाना खाने के लिए रुके। ढाबा काफी पुराना और वीरान लग रहा था
,
लेकिन भूख के मारे उन्होंने वहाँ रुकने का फैसला किया।
जैसे ही वे अंदर गए
,
एक अजीब सी ठंडक महसूस हुई। ढाबा अंदर से और भी ज़्यादा डरावना था। लकड़ी की पुरानी मेजें और कुर्सियाँ
,
दीवारों पर मकड़ी के जाले और हवा में एक अजीब सी गंध थी। लेकिन उनकी भूख इतनी बढ़ चुकी थी कि उन्होंने इन सब चीजों पर ध्यान नहीं दिया।
एक लंबे
,
दुबले-पतले वेटर ने उनका स्वागत किया। उसकी आंखों में कुछ अजीब सा था
,
जैसे वह सीधे उनकी आत्मा में झाँक रहा हो। उसने बिना कुछ बोले
,
इशारे से उन्हें एक टेबल की तरफ जाने को कहा। विशाल और उसके दोस्तों ने उसे अजीब नज़रों से देखा
,
लेकिन फिर भी वे जाकर बैठ गए।
वेटर ने उन्हें एक पुराना
,
धूल भरा मेन्यू दिया। उसमें सिर्फ कुछ ही खाने की चीज़ें लिखी थीं। विशाल ने मेन्यू से खाना ऑर्डर किया और वेटर बिना कुछ कहे
,
धीरे-धीरे चला गया।
कुछ समय बाद
,
वेटर वापस आया और उनके सामने थालियाँ रख दीं। भोजन की महक अच्छी थी
,
लेकिन उसमें कुछ अलग था। खाने का स्वाद अजीब था
,
लेकिन उनकी भूख के चलते वे खाते चले गए।
जैसे ही उन्होंने खाना खत्म किया
,
एक जोरदार गरज के साथ बिजली कड़की और ढाबे की सारी बत्तियाँ बुझ गईं। अंधेरे में
,
विशाल ने अपने दोस्तों को आवाज़ लगाई
,
लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वह कुछ समझ पाता
,
तभी उसे पीछे से किसी के भारी साँस लेने की आवाज़ सुनाई दी। वह घबराकर पीछे मुड़ा
,
तो उसने देखा कि वेटर उसके ठीक पीछे खड़ा था
,
उसकी आँखों में वही अजीब सी चमक थी।
वेटर धीरे-धीरे मुस्कुराया और बोला
,
"तुम लोग वह खाना खा चुके हो जो तुम्हें कभी नहीं खाना चाहिए था। अब तुम मेरे मेहमान बन गए हो
...
हमेशा के लिए।"
विशाल ने डर के मारे चीखने की कोशिश की
,
लेकिन उसकी आवाज़ कहीं खो गई। उस दिन के बाद
,
किसी ने विशाल और उसके दोस्तों को कभी नहीं देखा।
कहते हैं
,
वह ढाबा आज भी उसी जगह है
,
लेकिन जो भी वहाँ खाना खाने जाता है
,
वो फिर कभी वापस नहीं आता।
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