गांधी-कुटुंब, जान पड़ता है, पहले पन्सारी का धंधा करता थागांधी


गांधी-कुटुंब, जान पड़ता है, पहले पन्सारी का धंधा करता थागांधी-कुटुंब, जान पड़ता है, पहले पन्सारी का धंधा करता था, पर मेरे दादा से लगाकर तीन पीढ़ियों से तो वह दीवानगिरी करता आया है। मेरे दादा उत्तमचंद गांधी उर्फ ओता गांधी टेकवाले आदमी रहे होंगे। दरबारी साजिशों के कारण उन्हें पोरबंदर छोड़ना पड़ा। वहां से जाकर उन्होंने जूनागढ़ राज्य में आश्रय लिया। उन्होंने नवाबसाहब को सलाम बायें हाथ से किया। किसी ने इस स्पष्ट अविनय का कारण पूछा तो जवाब मिला, "दाहिना हाथ तो पोदबंदर को दिया जा चुका है।", पर मेरे दादा से लगाकर तीन पीढ़ियों से तो वह दीवानगिरी करता आया है। मेरे दादा उत्तमचंद गांधी उर्फ ओता गांधी टेकवाले आदमी रहे होंगे। दरबारी साजिशों के कारण उन्हें पोरबंदर छोड़ना पड़ा। वहां से जाकर उन्होंने जूनागढ़ राज्य में आश्रय लिया। उन्होंने नवाबसाहब को सलाम बायें हाथ से किया। किसी ने इस स्पष्ट अविनय का कारण पूछा तो जवाब मिला, "दाहिना हाथ तो पोदबंदर को दिया जा चुका है।
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